:
Breaking News

Bihar News: IGIMS में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा धांधली मामले में 6 MBBS छात्र निलंबित

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | आईजीआईएमएस पटना में एमबीबीएस पूरक परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और धांधली मामले में छह छात्रों को चार सप्ताह के लिए निलंबित किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संस्थान ने कार्रवाई की।

पटना, 6 अगस्त। आलम की खबर: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में एमबीबीएस पूरक परीक्षा से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा अनियमितता मामले में संस्थान प्रशासन ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। छात्र अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर छह एमबीबीएस छात्रों को चार सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी निलंबित छात्रों को छात्रावास खाली करने का निर्देश दिया गया है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित छात्र हॉस्टल में नहीं रह सकेंगे और यदि वे परीक्षा में सर्वोच्च अंक भी प्राप्त करते हैं तो उन्हें किसी प्रकार का सम्मान या पुरस्कार नहीं दिया जाएगा।

कार्रवाई की जद में आए छात्रों में वर्ष 2022 बैच के अभिजीत कुमार, अंकित चंद्रा और यश राज सिन्हा के अलावा वर्ष 2023 बैच के अमित कुमार, अविनाश प्रकाश और सुमित कुमार शामिल हैं। संस्थान ने सभी छात्रों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद यह फैसला लिया है। हालांकि इस पूरे मामले में अब तक किसी भी स्तर पर प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है।

मामले की शुरुआत एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा के बाद हुई थी। परीक्षा दिसंबर 2025 में आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 130 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। परीक्षा के कुछ समय बाद संस्थान को एक अज्ञात ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें प्रश्नपत्र और परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संस्थान प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष नहीं माना। रिपोर्ट में उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंका व्यक्त की गई। जांच के दौरान कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में हस्ताक्षरों को लेकर भी असामान्य स्थिति सामने आई। बताया गया कि उत्तर पुस्तिका के अलग-अलग हिस्सों पर किए गए हस्ताक्षरों में समानता नहीं थी, जिसे समिति ने गंभीर अनियमितता माना।

रिपोर्ट मिलने के बाद संस्थान प्रशासन ने संबंधित पूरक परीक्षा को रद्द कर दिया था और परीक्षा विभाग के कर्मचारियों सहित सात छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद विस्तृत जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां गठित की गईं। एक समिति छात्रों के जवाबों की समीक्षा कर रही है, दूसरी भविष्य में निष्पक्ष परीक्षा के लिए नई व्यवस्था तैयार करेगी, जबकि तीसरी समिति पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देगी।

संस्थान प्रशासन का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी व्यापक सुधार प्रक्रिया शुरू की गई है।

यह भी पढ़ें:

• AI Summit में CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान

• बिहार राजस्व विभाग में 20 अधिकारियों का तबादला

शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता सबसे बड़ी आवश्यकता

उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था पर टिकी होती है। यदि प्रश्नपत्र लीक या परीक्षा में गड़बड़ी जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो इसका असर केवल कुछ छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का विश्वास बना रहे और भविष्य में परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित बन सके।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *